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Showing posts with the label poem

2021 love poem। tum ho

     हकीकत भी तुम हो ख्वाब भी तुम हो , मेरे हर सवाल के जवाब भी तुम हो।। लिखती हैं कलम मेरे जो भी अल्फाज, उन अल्फाजों से बनी मेरी किताब भी तुम हो ।। तेरे एहसास इस कदर समा गए मुझमें, लगता है मेरे दिल के नवाब भी तुम हो।। धड़कते हो मेरे सीने में तुम इस कदर,  जैसे मेरे मोहब्बत के रूबाब भी तुम हो।। देखते ही तुझे नशे में हो जाते हम ऐसे, यूं लगता मेरी जिंदगी का शबाब भी तुम हो।। *****

Alone Shayari।Tanhai shayri

क्या करूं मैं उम्मीद उस शख्स से .... जिसे खबर ही नहीं कि....  हम तन्हा कितने हैं। ।

Love poem। Intajar hota hai

उनके आने का इंतजार हर बार होता है। वो वक्त पर आते नहीं ये बार-बार होता है।। उनसे इजहार का ख्याल हर बार होता है। उन्हें देख जुबा कुछ कहती नहीं ये बार-बार होता है।। मेरी आंखों से इशारा हर बार होता है। वो इशारा समझते नहीं ये बार-बार होता है।। हाथ थाम बैठती हूं उनका ये हर बार होता है। फिर भी वह नहीं समझते ये बार-बार होता है।। उन्हें बाहों में भरने का आगाज हर बार होता है। दोस्त कहकर वो भी लगाते गले ये बार-बार होता है।। *****

Morning poem। Meri chaye

मेरी चाय की चुस्की में वो गर्माहट है....। जैसे मेरे लबों की तेरे लबों पर आहट है।। हर घूंट में बस तेरा नाम लिए जा रहे हैं.......। हो जाए ना खत्म इसलिए धीरे-धीरे पिए जा रहे हैं।। उस चाय में तेरी मोहब्बत साथ होती है......। इसलिए तो सुबह की चाय मेरे लिए खास होती है।। हर दिन आंख खुलते हैं उस चाय का इंतजार होता है.....। क्या बताऊं उसे पास देखने को दिल कितना बेकरार होता है।। जैसे ही हो जाती है मेरी चाय वो खत्म.........। दिल होता खुश अगली सुबह फिर तेरे पास होंगे हम।। *****

Love ghazal। Itni mohabbat hai

 यह खालीपन जो तेरे आने से भर जाता है। दिल इतनी मोहब्बत तुझसे कर जाता है।। तेरी नजरें मुझे प्यार से जब देखती हैं। मेरा चेहरा तो और भी संवर जाता है।।

Lonely poem। Raat tanhai ki

जिंदगी की भीड़ में जाने क्यों तन्हाई सी छाई थी। लगता था दिल को किसी की याद बहुत आई थी।। यूं लगा जैसे कोई छू के गुजरा मुझे...। देखी पलट के तो पीछे मेरी ही परछाई थी।। बैठे-बैठे देखती रही मै आसमां को रात भर। कितनी खूबसूरत तारों की चमक वहां छाई थी।। चांद छुपा था बादल में फिर भी......। जाने क्यों वह रात आंखों को बहुत भाई थी।। हल्के हल्के हवा के झोंके जब भी चलते। ऐसा लगा मुझे देख पतिया भी गुनगुनाई थी।। वो अंधेरी रात जाने क्यों ऐसी थी यारों। जो दिल में मेरे मोहब्बत फिर जगाई थी।। सन्नाटा था चारों तरफ रास्ते भी थी सूने पड़े..। फिर भी लगा दरवाजे पर दर्द की बारात आई थी।। यह तो होना ही था एक दिन अपनी जिंदगी में। दिल के आशियाने को मोहब्बत से जो सजाई थी।। आंखें तो भर चुकी थी अश्कों की बूंदों से। फिर भी जाने क्यों उस रात में मुस्कुराई थी। । उसकी चाहतो से तो आज भी भरा है दिल मेरा। इसलिए उस रात भी मैं उसे भूल नहीं पाई थी।। पाना चाहते थे दोनों साथ अपने इश्क की मंजिल। लेकिन किस्मत ने ही लिखी अपनी जुदाई थी।। *****

Judaai poem। Kasam duriyo ki

दूरियों की परवाह ना तुमने की ना मैंने की। अपने दर्द पे आह ना तुमने की ना मैंने की।। वक्त बीतता रहा तुझसे मिलने के इंतजार में। फिर भी वक्त से बगावत ना तुमने की ना मैंने की।। एक अरसा बीत गया तुझसे दीदार को हमदम। फिर भी किसी और से मोहब्बत ना तुमने की ना मैंने की।। इतना यकीन है हमें अपनी वफाओं पर की। एक दूसरे से शिकायत ना तुमने की ना मैंने की।। न जाने कितने पड़ाव पार किए हम दोनों ने। फिर भी समझौता हालात से ना तुमने की ना मैंने की।। खुदा भी पूछ बैठा तेरी मोहब्बत में इतनी शिद्दत क्यों है। फिर भी उनसे कोई सवाल ना तुमने की ना मैंने की।। दिल उनके सामने सारे राज खोल भी दिया। फिर भी उनसे,मिलने की दुआ ना तुमने की ना मैंने की।। क्योंकि कर दिया था जुदा हमें एक दूसरे की कसम देकर। और उस दिन से एक मुलाकात ना तुमने की ना मैंने की।। *****

Dard Shayari । Mohabbat me dard

मोहब्बत में हर दर्द को हमने जिया है,  होठों पर लाकर मुस्कुराहट........  आसुओं को हमने पिया है।।                             

Love hindi Poem । Karib Na Aao

इतने करीब ना आओ कि खुद को संभाल ना सकूं। ना चाहते हुए भी तेरी बातों को मैं टाल ना सकूं।। अपने नजरों से कहो मेरी नजरों से खुद को ना मिलाए। कि तेरी तस्वीर अपने आंखों से मैं निकाल ना सकूं।। कहो अपने अल्फाजों से मेरे दिल पर वह दस्तक ना दे। कि अपने अल्फाजों को ही अपने संभाल ना सकूं।। मत हो बेकरार तुम मेरी चाहत को पाने के लिए। क्या पता तेरी चाहत में खुद को मैं ढाल ना सकूं।। यू ना करो मजबूर हमें अपनी मोहब्बत को जगाने पर। कि तेरे जाने के बाद दिल में अपने नफरत पाल ना सकूं।। *****

Best love poem।Teri Chahat

तेरे साथ बिताए लम्हों को तो.... बिखेर दिया हमने हर जगह, पर तुझ से दूरी का दर्द बिखेरू तो कहाँ....।। तेरी यादों को मुस्कान बनाकर तो... बिखेर दिया हमने हर जगह, पर अपने आंसुओं को बिखेरू तो कहाँ...।। तेरी चाहत की कहानी को तो... बिखेर दिया हमने हर जगह, पर उसमें छुपे गम को बिखेरू तो कहाँ .....।। तेरी मोहब्बत की निशानी को तो.... बिखेर दिया हमने हर जगह, पर उसकी सच्चाई को बिखेरू तो कहाँ.....।। तेरे प्यार के एहसास को तो..... बिखेर दिया हमने हर जगह, पर तेरे जुदाई का दर्द बिखेरू तो कहाँ.....।। ******

Hearttouching poetry। Meri Mohabbat

मिला था वो मुझे वर्षों इस कदर।  जैसे मिली थी मेरी मोहब्बत से नजर।। आंखों ही आंखों में उसने दिल चुरा लिया। कुछ वक्त में ही मेरी नींद उड़ा लिया।।  पलट कर एक दूसरे को देखते हर मोड़ पर। फिर हट जाती नजर सड़कों के शोर पर।। इश्क की राहों में कदम हम बढ़ा रहे थे।  दिल को मोहब्बत की किताब पढ़ा रहे थे।। हर दिन यूं ही हमारी मुलाकात होती।  आंखों की आंखों से ही बस बात होती।। वक्त की करवट से हो गए हम दूर। कहां ढूंढे उसे इतने थे हम मजबूर।। फिर भी आंखें उसका इंतजार करती रही। यादों से ही उसके बस प्यार करती रही।।  वर्षों बाद आया जब वह सामने। दिल को लगी मैं जोरो से थामने ।। वह मुस्कुरा कर मेरा हाल पूछ बैठे। हो गए कितने वह साल पूछ बैठे ।। हमने पूछा जब उनसे ख्याल मोहब्बत का। उसने जिक्र किया किसी और की कुर्बत का।। दुआओं के साथ मोहब्बत से उसे आजाद कर दिया। और हाथों ने थाम कर कलम मुझे आबाद कर दिया।। कुर्बत - नजदीकी  *******

Intezar poem । Mera Intejar

  कभी जो गुजरोगे मेरी गली से तुम...... पलके उठा मेरे आशियाने का दीदार कर लेना।। जो ना दिखूं मैं तुझे थोड़ी देर वहां........ कुछ देर होकर खड़े मेरा इंतजार कर लेना।। आ जाऊं जो अपने बरामदे में मैं...... नजरें उठाकर मुझसे आंखे दो-चार कर लेना।। जो पड़े तुझ पर नजर किसी की......  बहाने उससे तुम अपने हजार कर लेना।। तेरी एक झलक से सुकून मिलता है...... हर दिन तू मेरी गली यू ही पार कर लेना।। आऊंगी जरूर तेरी आंखों में मोहब्बत देखने.... इतना तो यकीन मुझ पर मेरे यार कर लेना।। *****

Love Sad Poem। Socha na tha

बड़ी आरजू थी उन्हें दिल में बसाने की, उनके हर गम को अपना बनाने की, रूठे वह तो हर पल उन्हें मनाने की, जिंदगी के सफर में.... . हर कदम पर साथ निभाने की, पर जुदा हो जाएंगे वह ऐसे... ये सोचा ना था उसे पाने की हसरत अधूरी रह जाएगी.... ये सोचा ना था रह जाएंगे हम यूं अकेले ये सोचा ना था उनके याद में कट जाएगी जिंदगी ये सोचा ना था हो जाएँगे वह मुझसे इतने पराए ये सोचा ना था हो जाएगी उससे मेरी जुदाई ये सोचा ना था होकर जुदा ऐ दिल उदास मत होना क्योंकि उसकी मोहब्बत मुझमे समाई है वो जाता है तो जाने दे.... हमने तो वफा दिल से निभाई हैं।  *****

Ehsas love poetry । Ek waqt wo bhi tha

एक वक्त वो भी था ..... जब एहसास मोहब्बत का. .. हमें भी हुआ था, किसी की धड़कनों ने..  मेरी धड़कनों को छुआ था, एक वक्त वो भी था.... जब एहसास मोहब्बत का... हमें भी हुआ था।। मेरी आंखें उसकी आंखों में ही डूबी थी.. ना जाने उसमें क्या ऐसी खूबी थी, उसके लबों की खामोशी... इस कदर सता रही थी... जैसे उसके दिल का पता.. मुझे बता रही थी, मेरी जिंदगी में जलता... मोहब्बत का वो धुआं था, एक वक्त वो भी था.... जब एहसास मोहब्बत का.... हमें भी हुआ था।। वो गया था... दो राहों के बीच मुझे छोड़ कर, रूह का रिश्ता पल भर में तोड़ कर, सात फेरों के बंधन में जब वह बंधा था... मैं खड़ी थी तन्हा इश्क के मोड़ पर, ना जाने प्यार का ये कैसा जुआ था.. एक वक्त वो भी था.... जब एहसास मोहब्बत का... हमें भी हुआ था।। मोहब्बत का यह कैसा दस्तूर है... जिसे चाहा शिद्दत से... दिल आज उसे भूलाने पर मजबूर है, जो रहते थे कभी हमेशा दिल के करीब... आज लगता आसमां से भी वो दूर है, मेरी चाहत का गहरा हो कुआं था.... एक वक्त वो भी था.... जब एहसास मोहब्बत का... 

Motivational Story । Ek nayi soch

ट्रेन जैसे ही रुकी उसकी नींद खुल गयी।यो घबरातें हुए खिड़की से बाहर देखा और शांत हो गया।अभी उसका स्टेशन नही आया था। साहिल जो अपने गाँव से graduationकरने के लिए शहर को जा रहा है।साहिल पढ़ाई में और हर काम में तेज था एक बड़े कॉलेज में उसका एडमिसन होता है।वो काफी खुश था। उसकी सारे लड़को से अच्छी जमती थी और उसके नम्बर भी अच्छे आते थे एक दिन उसे अचानक से पता चला की उसके कालेज का एक लड़का फेल होने की वजह से आत्महत्या कर लिया।वो काफी उदास सा था। दरसल वो लड़का साहिल के अच्छे दोस्तों में से एक था और उसे इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नही था की वो ऐसा भी कर सकता है।और उसने कभी साहिल को कुछ बताया भी नही ।और साहिल ने गौर किया की कुछ दिनों में काफी लड़को ने फेल होने की वजह से आत्महत्या कर ली अक्सर वो न्यूज़पेपरों में पढ़ता कभी इस शहर तो कभी उस शहर में कोई न कोई ऐसी खबर मिल ही जाती।और इस बात से वो काफी परेशां सा हो गया था।वो अपने पढाई में भी ध्यान ही नही दे पा रहा था।बस अब खोया खोया रहने लगा।कुछ दिनों बाद साहिल के पापा उससे मिलने आएं और उन्हें ये समझते देर न लगा कि साहिल कुछ उदास और परेशां सा है।उन्होंने उसस

ग़ज़ल लिख रही हूँ!!

बीते हुए कुछ मैं कल लिख रही हूँ! याद में तेरी एक ग़ज़ल लिख रही हूँ!! मिलाया था अपनी आँखों को , मैने तेरी ही आँखों से... हुई थी शुरूआत मोहब्बत की , दिल में फूटते पटाखों से... प्यार के कुछ मैं पजल लिख रही हूँ , याद में तेरी एक ग़ज़ल लिख रही हूँ!! वो तेरे होंठों की मुस्कुराहट ने , मेरी धड़कन बढ़ायी थी... तेरी हाथों की छुअन से , मैं थोड़ी घबराई थी... बेताब थी तेरे लबों से जो , प्यार के शब्द सुनने को... वही मैंं सुनहरे पल लिख रही हूँ , याद में तेरी एक ग़ज़ल लिख रही हूँ!! तेरे न मिलने की रब से , मुझे कोई शिकायत नही... ये न समझना अब... मुझे , तुझसे मोहब्बत नही... निकले थे तेरी जुदाई में जो आँसू , आज भी मैं वो जल लिख रही हूँ , याद में तेरी एक ग़ज़ल लिख रही हूँ!!  -  तन्वी सिंह

ज़िंदगी जाने कहाँ ले जाती है..

जागते रहे रात भर ये सोचते हुए... ज़िंदगी हमें जाने कहाँ ले जाती है , न पहुँच पाती जहाँ सोच हमारी.. हमें वो वहाँ ले जाती है..... थाम कर हम हाथ उसका , चले जाते है उसके साथ में , हमें वो जहाँ ले जाती है , जागते रहे रात भर ये सोचते हुए , ज़िंदगी हमें जाने कहाँ ले जाती है!! कभी तन्हाई के घर बैठा जाती है... तो कभी शहनाई की गली दिखा जाती है , समझ नही पाते हम जिन रास्तों को , हमें वो वहाँ ले जाती है.... चले जाते है हम साथ उसके , हमें वो जहाँ ले जाती है , जागते रहे रातभर ये सोचते हुए... ज़िंदगी हमें जाने कहाँ ले जाती है!! कभी ऊँचाईयों पर ले जा.... हमें वो आसमां दिखाती है , तो कभी खुद को समझने के लिए , जमीं पर वो गिराती है , सुलझा सके हम जिन्हें... ऐसी पहेली के सागर में ले जाती है , जागते रहे रातभर ये सोचते हुए... जिंदगी हमें जाने कहाँ ले जाती है!! - तन्वी सिंह

वक्त तो लग जाता है!!

दिल पर लगती है जब चोट, समझदारी का मरहम हम लगाते हैं, तो उस जख़्म को भरने में भी... वक्त तो लग जाता है!! चाहते हैं उस दर्द से हमें आँसू न आये, लेकिन छुपा के आँसू को मुस्कुराने में.... वक्त तो लग जाता है!! जख़्म हो न जाये ताजा इसलिए, कुछ यादों को हम मिटाना चाहते हैं, फिर भी उन बातों को भूलने में... वक्त तो लग जाता है!! हम जानते हैंं हम मानते हैंं, खुदा की हर बात अच्छी है, जो होता है अच्छे के लिए, लेकिन दिल को ये बात समझने में... वक्त तो लग जाता है!! - तन्वी सिंह

बदनाम करती है!

हर रात मुझे जाने क्यों वो बदनाम करती है! कलम खुद को जब कागज के नाम करती है!! करती है शिकायतें वो जी भर के मुझसे! कागज से मिले बिना जब वो शाम करती है!! रूठ जाती है कभी-कभी वो मुझसे इस कदर! सुबह से जैसे कितना वो काम करती है!! नींद भी आँखों के करीब खुद को लाती नही! दूर से ही उसे वो नमस्ते सलाम करती है!! वक्त भी मुस्कुरा के देखता है उसे रातभर! जब कलम अपनी मोहब्बत सरेआम करती है!! - तन्वी सिंह