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Best love poetry। Mohabbat likh rahi hu

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  दिल की मैं अपनी हसरत लिख रही हूं। तुझ से हुई शिद्दत से वो मोहब्बत लिख रही हूं।।   जिसे मैं कर न सकी कभी लब से बयां। कलम से मैं अपनी वो चाहत लिख रही हूं।।  मिलता है सुकून जो तेरे पास रहकर। स्याही में लपेटकर वो राहत लिख रही हूं।।  साथ रहकर करते रहे जो नजाकत हम तुम । यादों में समेट कर अपनी वो शरारत लिख रही हूं।।  लिखने को तो लिख दूं हर एहसास को मैं। पर तेरी ना छूटने वाली अपनी वो आदत लिख रही हूं।।  रहो तुम जहां कही भी ओ मेरे हमदम। तेरी खुशी के लिए खुदा से  मैं इबादत लिख रही हूं।। ******

Love shayari। Shauk-e-mohabbat

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      शौक-ए-मोहब्बत में मैं इस कदर आबाद हुआ, .          दिल के टुकडे हुए हजार फिर भी दिल सरताज हुआ।।

2021 love poem। tum ho

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     हकीकत भी तुम हो ख्वाब भी तुम हो , मेरे हर सवाल के जवाब भी तुम हो।। लिखती हैं कलम मेरे जो भी अल्फाज, उन अल्फाजों से बनी मेरी किताब भी तुम हो ।। तेरे एहसास इस कदर समा गए मुझमें, लगता है मेरे दिल के नवाब भी तुम हो।। धड़कते हो मेरे सीने में तुम इस कदर,  जैसे मेरे मोहब्बत के रूबाब भी तुम हो।। देखते ही तुझे नशे में हो जाते हम ऐसे, यूं लगता मेरी जिंदगी का शबाब भी तुम हो।। *****

Doori love poem। Meri hasrat

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मेरी हसरतों का फेरा है। ख्वाहिशों ने हमें घेरा है।। रातें गुजरती चैन से....पर। हर दिन यादों का सवेरा है।। तुम दूर हो मुझसे लेकिन। दिल में बस तेरा ही डेरा है।। मोहब्बत का नाम ले जब कोई। आंखों में दिखता चेहरा तेरा है।। धड़कता है "तन्वी" जो मेरे अंदर। वो धड़कन तेरी और दिल मेरा है।। *****

Love lonely poetry। Mohabbat hai akelepan se

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मोहब्बत है मुझे उस अकेलेपन से , जहां खुद से खुद की मेरी बात होती है अपने आप से जहां मेरी मुलाकात हाेती है मोहब्बत है मुझे उस अकेलेपन से जहां आसमां, पहाड़, पौधे मेरे साथ होते हैं मुझे थामने को जहां तन्हाई के हाथ होते हैं मोहब्बत है मुझे उस अकेलेपन से जहां अपने दिल की आवाज खुद सुनती हूं अच्छे और बुरे विचारों को मैं चुनती हूं मोहब्बत है मुझे उस अकेलेपन से जहां चिड़िया अपने साज गुनगुनाती है जहां पत्तियां अपनी आवाज सुनाती हैं मोहब्बत है मुझे उस अकेलेपन से जहां, पवन मुझे बाहों में भर झूला झुलाती है जहां चांदनी खुद गाकर मुझे लोरी सुनाती है मोहब्बत है मुझे उस अकेलेपन से जहां चांद, सितारों के बीच अकेला होता है शांति होती है वहां, ना कोई मेला होता है मोहब्बत है मुझे उस अकेलेपन से जहां कुछ बीते पलों की याद सताती है तो मेरी सोच मंजिल का रास्ता बताती है मोहब्बत है मुझे उस अकेलेपन से जहां हाेंठ मेरे बिन कहे भी गुनगुनाते हैं जहां नयन मेरे बेवजह भी बरस जाते हैं मोहब्बत है मुझे उस अकेलेपन से जहां मेरी कलम सिर्फ मेरा एहसास समझती है और अल्फाज बनाकर उसे शायरी में क