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Showing posts with the label राजकुमारी

Love ghazal। Itni mohabbat hai

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 यह खालीपन जो तेरे आने से भर जाता है। दिल इतनी मोहब्बत तुझसे कर जाता है।। तेरी नजरें मुझे प्यार से जब देखती हैं। मेरा चेहरा तो और भी संवर जाता है।।

Lonely poem। Raat tanhai ki

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जिंदगी की भीड़ में जाने क्यों तन्हाई सी छाई थी। लगता था दिल को किसी की याद बहुत आई थी।। यूं लगा जैसे कोई छू के गुजरा मुझे...। देखी पलट के तो पीछे मेरी ही परछाई थी।। बैठे-बैठे देखती रही मै आसमां को रात भर। कितनी खूबसूरत तारों की चमक वहां छाई थी।। चांद छुपा था बादल में फिर भी......। जाने क्यों वह रात आंखों को बहुत भाई थी।। हल्के हल्के हवा के झोंके जब भी चलते। ऐसा लगा मुझे देख पतिया भी गुनगुनाई थी।। वो अंधेरी रात जाने क्यों ऐसी थी यारों। जो दिल में मेरे मोहब्बत फिर जगाई थी।। सन्नाटा था चारों तरफ रास्ते भी थी सूने पड़े..। फिर भी लगा दरवाजे पर दर्द की बारात आई थी।। यह तो होना ही था एक दिन अपनी जिंदगी में। दिल के आशियाने को मोहब्बत से जो सजाई थी।। आंखें तो भर चुकी थी अश्कों की बूंदों से। फिर भी जाने क्यों उस रात में मुस्कुराई थी। । उसकी चाहतो से तो आज भी भरा है दिल मेरा। इसलिए उस रात भी मैं उसे भूल नहीं पाई थी।। पाना चाहते थे दोनों साथ अपने इश्क की मंजिल। लेकिन किस्मत ने ही लिखी अपनी जुदाई थी।। *****

Judaai poem। Kasam duriyo ki

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दूरियों की परवाह ना तुमने की ना मैंने की। अपने दर्द पे आह ना तुमने की ना मैंने की।। वक्त बीतता रहा तुझसे मिलने के इंतजार में। फिर भी वक्त से बगावत ना तुमने की ना मैंने की।। एक अरसा बीत गया तुझसे दीदार को हमदम। फिर भी किसी और से मोहब्बत ना तुमने की ना मैंने की।। इतना यकीन है हमें अपनी वफाओं पर की। एक दूसरे से शिकायत ना तुमने की ना मैंने की।। न जाने कितने पड़ाव पार किए हम दोनों ने। फिर भी समझौता हालात से ना तुमने की ना मैंने की।। खुदा भी पूछ बैठा तेरी मोहब्बत में इतनी शिद्दत क्यों है। फिर भी उनसे कोई सवाल ना तुमने की ना मैंने की।। दिल उनके सामने सारे राज खोल भी दिया। फिर भी उनसे,मिलने की दुआ ना तुमने की ना मैंने की।। क्योंकि कर दिया था जुदा हमें एक दूसरे की कसम देकर। और उस दिन से एक मुलाकात ना तुमने की ना मैंने की।। *****

Dard Shayari । Mohabbat me dard

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मोहब्बत में हर दर्द को हमने जिया है,  होठों पर लाकर मुस्कुराहट........  आसुओं को हमने पिया है।।                             

Love hindi Poem । Karib Na Aao

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इतने करीब ना आओ कि खुद को संभाल ना सकूं। ना चाहते हुए भी तेरी बातों को मैं टाल ना सकूं।। अपने नजरों से कहो मेरी नजरों से खुद को ना मिलाए। कि तेरी तस्वीर अपने आंखों से मैं निकाल ना सकूं।। कहो अपने अल्फाजों से मेरे दिल पर वह दस्तक ना दे। कि अपने अल्फाजों को ही अपने संभाल ना सकूं।। मत हो बेकरार तुम मेरी चाहत को पाने के लिए। क्या पता तेरी चाहत में खुद को मैं ढाल ना सकूं।। यू ना करो मजबूर हमें अपनी मोहब्बत को जगाने पर। कि तेरे जाने के बाद दिल में अपने नफरत पाल ना सकूं।। *****

Best love poem।Teri Chahat

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तेरे साथ बिताए लम्हों को तो.... बिखेर दिया हमने हर जगह, पर तुझ से दूरी का दर्द बिखेरू तो कहाँ....।। तेरी यादों को मुस्कान बनाकर तो... बिखेर दिया हमने हर जगह, पर अपने आंसुओं को बिखेरू तो कहाँ...।। तेरी चाहत की कहानी को तो... बिखेर दिया हमने हर जगह, पर उसमें छुपे गम को बिखेरू तो कहाँ .....।। तेरी मोहब्बत की निशानी को तो.... बिखेर दिया हमने हर जगह, पर उसकी सच्चाई को बिखेरू तो कहाँ.....।। तेरे प्यार के एहसास को तो..... बिखेर दिया हमने हर जगह, पर तेरे जुदाई का दर्द बिखेरू तो कहाँ.....।। ******

Motivational Story । Ek nayi soch

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ट्रेन जैसे ही रुकी उसकी नींद खुल गयी।यो घबरातें हुए खिड़की से बाहर देखा और शांत हो गया।अभी उसका स्टेशन नही आया था। साहिल जो अपने गाँव से graduationकरने के लिए शहर को जा रहा है।साहिल पढ़ाई में और हर काम में तेज था एक बड़े कॉलेज में उसका एडमिसन होता है।वो काफी खुश था। उसकी सारे लड़को से अच्छी जमती थी और उसके नम्बर भी अच्छे आते थे एक दिन उसे अचानक से पता चला की उसके कालेज का एक लड़का फेल होने की वजह से आत्महत्या कर लिया।वो काफी उदास सा था। दरसल वो लड़का साहिल के अच्छे दोस्तों में से एक था और उसे इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नही था की वो ऐसा भी कर सकता है।और उसने कभी साहिल को कुछ बताया भी नही ।और साहिल ने गौर किया की कुछ दिनों में काफी लड़को ने फेल होने की वजह से आत्महत्या कर ली अक्सर वो न्यूज़पेपरों में पढ़ता कभी इस शहर तो कभी उस शहर में कोई न कोई ऐसी खबर मिल ही जाती।और इस बात से वो काफी परेशां सा हो गया था।वो अपने पढाई में भी ध्यान ही नही दे पा रहा था।बस अब खोया खोया रहने लगा।कुछ दिनों बाद साहिल के पापा उससे मिलने आएं और उन्हें ये समझते देर न लगा कि साहिल कुछ उदास और परेशां सा है।उन्होंने उसस

ग़ज़ल लिख रही हूँ!!

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बीते हुए कुछ मैं कल लिख रही हूँ! याद में तेरी एक ग़ज़ल लिख रही हूँ!! मिलाया था अपनी आँखों को , मैने तेरी ही आँखों से... हुई थी शुरूआत मोहब्बत की , दिल में फूटते पटाखों से... प्यार के कुछ मैं पजल लिख रही हूँ , याद में तेरी एक ग़ज़ल लिख रही हूँ!! वो तेरे होंठों की मुस्कुराहट ने , मेरी धड़कन बढ़ायी थी... तेरी हाथों की छुअन से , मैं थोड़ी घबराई थी... बेताब थी तेरे लबों से जो , प्यार के शब्द सुनने को... वही मैंं सुनहरे पल लिख रही हूँ , याद में तेरी एक ग़ज़ल लिख रही हूँ!! तेरे न मिलने की रब से , मुझे कोई शिकायत नही... ये न समझना अब... मुझे , तुझसे मोहब्बत नही... निकले थे तेरी जुदाई में जो आँसू , आज भी मैं वो जल लिख रही हूँ , याद में तेरी एक ग़ज़ल लिख रही हूँ!!  -  तन्वी सिंह

ज़िंदगी जाने कहाँ ले जाती है..

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जागते रहे रात भर ये सोचते हुए... ज़िंदगी हमें जाने कहाँ ले जाती है , न पहुँच पाती जहाँ सोच हमारी.. हमें वो वहाँ ले जाती है..... थाम कर हम हाथ उसका , चले जाते है उसके साथ में , हमें वो जहाँ ले जाती है , जागते रहे रात भर ये सोचते हुए , ज़िंदगी हमें जाने कहाँ ले जाती है!! कभी तन्हाई के घर बैठा जाती है... तो कभी शहनाई की गली दिखा जाती है , समझ नही पाते हम जिन रास्तों को , हमें वो वहाँ ले जाती है.... चले जाते है हम साथ उसके , हमें वो जहाँ ले जाती है , जागते रहे रातभर ये सोचते हुए... ज़िंदगी हमें जाने कहाँ ले जाती है!! कभी ऊँचाईयों पर ले जा.... हमें वो आसमां दिखाती है , तो कभी खुद को समझने के लिए , जमीं पर वो गिराती है , सुलझा सके हम जिन्हें... ऐसी पहेली के सागर में ले जाती है , जागते रहे रातभर ये सोचते हुए... जिंदगी हमें जाने कहाँ ले जाती है!! - तन्वी सिंह

वक्त तो लग जाता है!!

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दिल पर लगती है जब चोट, समझदारी का मरहम हम लगाते हैं, तो उस जख़्म को भरने में भी... वक्त तो लग जाता है!! चाहते हैं उस दर्द से हमें आँसू न आये, लेकिन छुपा के आँसू को मुस्कुराने में.... वक्त तो लग जाता है!! जख़्म हो न जाये ताजा इसलिए, कुछ यादों को हम मिटाना चाहते हैं, फिर भी उन बातों को भूलने में... वक्त तो लग जाता है!! हम जानते हैंं हम मानते हैंं, खुदा की हर बात अच्छी है, जो होता है अच्छे के लिए, लेकिन दिल को ये बात समझने में... वक्त तो लग जाता है!! - तन्वी सिंह

बदनाम करती है!

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हर रात मुझे जाने क्यों वो बदनाम करती है! कलम खुद को जब कागज के नाम करती है!! करती है शिकायतें वो जी भर के मुझसे! कागज से मिले बिना जब वो शाम करती है!! रूठ जाती है कभी-कभी वो मुझसे इस कदर! सुबह से जैसे कितना वो काम करती है!! नींद भी आँखों के करीब खुद को लाती नही! दूर से ही उसे वो नमस्ते सलाम करती है!! वक्त भी मुस्कुरा के देखता है उसे रातभर! जब कलम अपनी मोहब्बत सरेआम करती है!! - तन्वी सिंह 

ज़िंदगी इतनी रंगीन भी है!

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जिंदगी है, तो रास्ते भी हैं, रास्ते हैंं तो ठोकरें भी हैंं, ठोकरें हैंं तो मुश्किलें भी हैंं, मुश्किलें हैंं तो हौसले भी हैंं, हौसले हैंं तो मंजिलें भी हैंं, मंजिले हैंं तो पाने की चाहत भी है, चाहत है तो खुशी भी है, खुशी है तो गम भी है, गम है तो मुस्कुराहट भी है, मुस्कुराहट है तो आँसू भी हैंं, आँसू हैंं तो दुनिया गमगीन है, दुनिया गमगीन है तो हसीन भी है, इन रास्तों से गुजरे तो समझ आया, जिंदगी इतनी रंगीन भी है! - तन्वी सिंह

तेरा ख्याल

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यूँ जब चलती हूँ न मैं, तेरा ख़्याल साथ लेकर, जाने क्यों हर वो खूबसूरत ख़्याल, मेरे होंठों पे हँसी बिखेर देता है, यूँ ही मुस्कराते कभी रास्तों पे पड़े, पत्थरों को ठोकर लगाती हूँ, तो कभी आसमां देख कदम बढ़ाती हूँ, तेरे ख़्याल इतने हसीन होते हैं, कि रास्तों का पता नही चलता, जैसे-जैसे तेरे ख़्याल गहरे होते हैं, मैं उड़ती चली जाती हूँ, वक्त का पता भी नही चलता, कब अपनी मंजिल तक पहुँच गई, तेरा ख़्याल ही मेरे रास्तों के साथी होते हैं, जैसे संग दीया और बाती होते हैं, तेरा ख़्याल ऐसे थामे मेरा हाथ होता है, जैसे कोई हमसफर किसी के साथ होता है! -तन्वी सिंह 

यही है जिंदगी

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जिंदगी कभी हंसा कर, कभी रुला कर गई। कुछ याद द‍िला कर तो कुुुछ भुला कर गई, कभी नींंद उड़ा कर तो कभी गहरी नींंद सुला कर गई। जिंदगी कभी हंसा कर, कभी रुला कर गई। कभी नफरत भुला कर कभी मोहब्बत स‍िखा कर गई, कभी इश्क में डुबा कर तो कभी क‍िसी की चाहत में झुला कर गई। जिंदगी कभी हंसा कर, कभी रुला कर गई। कभी गले लगा कर कभी गला काट कर गई, कभी गम द‍िया तो कभी खुशियां बांट कर गई। कभी आसमां में उड़ा कर कभी जमीं पर ग‍िरा कर गई, कभी झूठ को तो कभी हकीकत को द‍िखा कर गई। कभी वक्त काे खामोश कर कभी वक्त को ह‍िला कर गई, जिंदगी कभी हंसा कर, कभी रुला कर गई। कभी हमें वो जिता कर, तो कभी वो हरा कर गई, हर पल कुछ एहसास द‍िला कर तो कुछ महसूस करा कर गई। कभी श‍िकवा तो कभी हमसे ग‍िला कर गई, फ‍िर भी श‍िकायत नहीं तुझसे ऐ ज‍िंंदगी, क्योंक‍ि तू मुुुझेे एक फूल की तरह ख‍ि‍ला कर गई। -तन्वी सिंह 

कमाल की थी उसकी मोहब्बत

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कमाल की थी उसकी मोहब्बत... दिल लगाया उसने दिल तोड़ने के लिए, हाथों को थामा उसने छोड़ने के लिए! कमाल की थी उसकी मोहब्बत... वादा किया था दूर नहीं जाने का, पर भूल गया वादा साथ निभाने का! कमाल की थी उसकी मोहब्बत... गहराई से तुझे जानता हूँ, कहता था, पर शक के घेरे में अक्सर वो रहता था! कमाल की थी उसकी मोहब्बत... देख मुझे वो गले लगाता भी था, होके दूर आँसू बहाता भी था ! कमाल की थी उसकी मोहब्बत.... रातों को मुझे वो जगाता भी था, बातों से अपनी सताता भी था! कमाल की थी उसकी मोहब्बत... रह नही पाता बिन तेरे, उसने कहा था भूल के हर दिन मुझे दूर भी रहा था कमाल की थी उसकी मोहब्बत... साथ किसी और का वो निभा गया, बस इतनी सी मोहब्बत वो दिखा गया! कमाल की थी उसकी मोहब्बत.. जाते जाते मुझे वो इल्जाम दे गया, मेरी चाहत को बेवफा नाम दे गया! कमाल की थी उसकी मोहब्बत! -तन्वी सिंह

Who is Tanveeii। परिचय राजकुमारी का

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राजकुमारी की कलम से... ब्‍लॉग की दुनिया में कदम रखते हुए पहली जद्दोजहद थी इसका नाम रखने की। कई नाम बने-बिगड़े मन में और फिर तय किया ये नाम। ये नाम यूं तो आत्‍ममुग्‍ध होने का संकेत भी देता है। लगता है कि खुद को ही क्‍यों राजकुमारी कह रही हूं... लेकिन ये आत्‍ममुग्‍धता नहीं, मेरा आत्‍मविश्‍वास और आत्‍मसम्‍मान है। मैं हूं अपने खयालाें की राजकुमारी, अपने शब्‍दों की शहजादी और अपने भावों की मल्लिका... मुझे ये कहना अच्‍छा लगता है कि मैं हूं अपनी ही स्‍वप्‍नपरी... मेरे अंदर बसी इसी राजकुमारी की कलम से निकले शब्‍द यहां मिलेंगे... और ये कलम बनेगी हर उस लड़की की आवाज, जो अपने सपनों की शहजादी है... ये कलम बनेगी हर उस शख्‍स की आवाज, जो खुद अपना शहंशाह है... ये कलम बनेगी आवाज, हर किसी की... - तन्‍वी