Ae Mere Vatan | Desh bhakti Poem



  ऐ वतन मेरे वतन...मेरे वतन..
है मुझे भारत माँ की कसम,
पीछे न कभी हटायेंगे कदम,
ऐ वतन मेरे वतन
न जान की फिकर,न मौत का भय है,
हारेंगे न हम कभी,जीत हमारी तय है,
ऐ वतन..मेरे वतन
दुश्मनों की छाती को छली हम कर जायेंगे,
हँसते-हँसते माँ की गोद में सो जायेंगे,
इंकलाब जिंदाबाद जिंदाबाद
भारत माता की जय..जय हो.जय हो
वन्दे मातरम्मा तरम्..मातरम्..
देश हमारा अमर रहे..अमर रहे अमर रहे..
हर बार ये कहते जायेंगे,
ऐ वतन..मेरे वतन
हार कभी न मानी है,
जीत के दिखायेंगे,
हममे है हिम्मत कितनी,
दुनिया को बतायेंगे,
ऐ वतन..मेरे वतन
न सोचा हमने काभी,
अपनी उस प्यारी माँ को,
गोद में जिसके महफूज हम रहते थे,
न सोचा हमने कभी,
उस परायी लड़की को,
मांग में भरके जिसके सिंदूर,
हम अपना बना के लाये थे,
न सोचा हमने कभी,
अपने प्यारे बाबा को,
जिनके हाथो ने हमे,
मुश्किलो से लड़ना सीखाया,
न सोचा हमने कभी,
उस मासूम गुड्डे-गुड़ियाँ को,
पूरी दुनिया को जिसने पापा कहके मुझे दिखाया,
सोचा है हमने सिर्फ,
अपने प्यारे तिरंगे को,
लहरे इसकी हम कभी,
कम न होने देंगे,
अपनी भारत माँ की आँखे,
नाम कभी न होने देंगे,
गर सोचा किसी ने,
करने को तबाह तिरंगे को,
बतायेंगे फिर औकात हम उन फिरंगो को,
मिटा देंगे उनकी आन-बान और शान को,
लगा के अपनी जान की बाजी,
बचायेंगे अपने हिंदुस्तान को,
ऐ वतन..मेरे वतन
पीछे न कभी हटायेंगे कदम,
ऐ वतन..मेरे वतन !

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