Dard hindi Poetry। Dard-e-mohabbat


रात होती थी गहरी बहुत!
फिर भी रातों को सोया न गया!!

जिंदगी में दर्द मिलें थे बहुत!
पर आँखों को ज्यादा रोया न गया!!

लोगों ने ख्वाब दिखाये बहुत!
पर उन ख्वाबों में खोया न गया!!

तकलीफ दिल को हुई थी बहुत!
काँटे राहों में किसी के बोया न गया!!

दर्द की थी गहराई भी बहुत!
लेकिन जीवन कभी ढ़ोया न गया!!

दिल सबके प्यार से जीते बहुत!
झूठें धागो से रिश्तें पिरोया न गया!!

इल्म है मोहब्बत दर्द देती है बहुत!
पर उसकी निशानी कभी धोया न गया!!

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