वफ़ा के फूल

     
वफ़ा के फूल जो खिलाई उसके दिल मे!
न जाने क्यों आज वो मुरझाने लगे!!

होती थी जहाँ कभी फूलों की बौछार!
आज वही सिर्फ कॉटे ही नजर आने लगे!!

होता था जहाँ कभी खुशियों का सवेरा!
वही गम आज अपना घर बनाने लगे!!

देती थी जहाँ कभी चाँदनी शीतल छाँव!
वही आज अँधेरे खुद को सजाने लगे!!

उनकी वफ़ाओं को मैनें सजा के रखा था!
लेकिन मेरे फूलों को ही वो मिटाने लगे!!

खिले थे जब फूल प्यार के उनके दिल में!
वो बीता वक्त मुझे वो याद दिलाने लगे!!

तैरने लगी थी मैं इश़्क के समंदर में!
मोहब्बत मे खुद को जब मिलाने लगे!!

मैं गुनहेगार और वो बेकसूर हो गये है!
धीरे-धीरे मुझसे ये वो जताने लगे!!

कभी जो हमें दिलों जा से चाहा करते थे!
डर-डर के आज वो नाम मेरा बताने लगे!!

क्या हुआ मेरी फूलों की खूशबू वो न समझा!
उसे तो मोहब्बत समझने में ही जमाने लगे!!

फिर भी दिल मुस्कुरा रहा है ये सोचकर!
कि दर्द में भी मोहब्बत हम कमाने लगे!!

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