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एक खूबसूरत दिल

आई थी मैं भी उस रात,
जा रही थी जब तेरी बारात,
घोड़े पे बैठ सहरा बाँधे,
जब तुम घर से निकले थे,
दिल में अरमां जाने कितने पिघले थे,
सोची एक पल के लिए,
आकर पास तेरे मै पूछ लू,
कि कहाँ गये वो वादें,
जो तुमने मुझसे किए थे,
कहाँ गई वो मोहब्बत,
जो तुमने मुझे दिए थे,
फिर मेरे दिल ने कहा-
ऐ मेरी शहजादी,
न सोच तू ऐसा,
उसकी खुशी के बीच,
अपना दर्द न आने दे,
वो निकला है अपने सफर पे,
उसे अपनी मंजिल तक जाने दे,
तेरी एक गलती से जाने,
कितने लोग रूठ जाएँगे,
तेरे एक कदम से जाने,
कितने रिश्ते टूट जाएँगे,
तू करती है उससे मोहब्बत,
तो उसकी खुशी मे तू,
अपनी खुशी मिला दे,
सारे नफरतों को तू,
आज अभी भूला दे,
नफरत की आग से जाने,
कितन घर जले है,
मोहब्बत की बारिस से,
पत्थर दिल भी पिघले है,
ऐ दिल..........तूने भी,
कितना दर्द सहा है,
तू भी उसके लिए तड़पा है,
फिर आज तू ऐसी,
बातें क्यों करता है,
दिल ने मुस्कुरा के कहा-
इसी सहन से एहसास हुआ,
इबादत क्या होती है,
इसी तड़पन ने बता़या,
मोहब्बत क्या होती है,
पोछ ले तू अपने आँसू,
अपने गमों से उसे आजाद कर,
करके अपने खुदा का सजदा,
आज उसे आबाद कर,
तेरी खुशी के लिए ऐ दिल,
करती है "तन्वी"ये रब से दुआ,
उसकी जिंदगी मे हमेशा,
खुशियों की बौछार रहे, 
छुटे न कभी उनका साथ,
इतना उनके बीच प्यार रहे !

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