सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

सफर नही हमसफर की बात थी

सफर नही हमसफर की बात थी, 
हुई जब उनसे पहली मुलाकात थी!!

अनजान ही थे एक दूसरे से हम,
खामोशी थी ज्यादा अल्फ़ाज थे कम, 
दिल में ही छुपी हमारी जज़्बात थी,
सफर नही हमसफर की बात थी...
हुई जब उनसे पहली मुलाकात थी!!

वो नजरों से नजरें मिलाए जा रहे थे, 
खुद को उनसे हम छुपाए जा रहे थे, 
दोनों के होंठों पे मुस्कुराहट साथ थी, 
सफर नही हमसफर की बात थी..
हुई जब उनसे पहली मुलाकात थी!!

गयी थी मिलने मैं उनसे इस कदर, 
मिली हो जैसे मुझे मोहब्बत की खबर, 
जागकर बीतायी एक दिन पहले की रात थी, 
सफर नही हमसफर की बात थी...
हुई जब उनसे पहली मुलाकात था !!

बातें उसकी दिल में घर करने लगी थी, 
हाथों को मिलाया जब धड़कनें बढ़ने लगी थी, 
बड़ी खूबसूरत मिली मुझे ये सौगात थी, 
सफर नही हमसफर की बात थी...
हुई जब उनसे पहली मुलाकात थी !!

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Pyar to kar leti। Breakup Poems 2021

इतना सा मुझ पर सनम ऐतबार तो कर लेती । अपने मंडप में मेरा थोड़ा इंतजार तो कर लेती।।  मैं आया था वहां दौड़ कर तेरे दरवाजे पर। गले लग कर मुझे थोड़ा प्यार तो कर लेती ।। तेरी दुनिया मैं बसा नहीं पाया तो क्या हुआ।  मिलने को खुद को ज़रा बेकरार तो कर लेती।। मैं जानता हूं तोड़ा है मैंने दिल तुम्हारा....। माफी मांगने का थोड़ा हकदार तो कर लेती।। माना कि हमारी दूरी खुदा की फरमाइश थी...। पर चाहत में खुद को थोड़ा वफादार तो कर लेती।। ******

Sad Love Poetry | Teri Yaad Me

  रात गुजरती रही तकिए पर रोते हुए.....। सुबह लगा एक अरसा हो गया ना सोते हुए। ।  तुम्हें क्या पता मोहब्बत छुपाना कैसा होता है।  कुछ ना कह पाए हम तेरे सामने होते हैं ...।।  अपने अश्कों को मुस्कान बनाकर बिखेरते रहे..।  दिल में ना जाने कब से दर्द का बोझ ढोते हुए।।  तुम तो बीते वक्त का एहसास सुनाते रहे ....।  और उन्हें सुनते रहे हम तेरी याद में खोते हुए।।  आज तुम किसी और के अमानत बन गये....।  और रह गए हम तन्हाई की फसल बोते हुए।। *******

Ajnabi Se Jaan Hokar...Phir Ajnabi Ho Jana | Breakup Love Poetry

  आसान है क्या  किसी को छोड़.... किसी और को दिल में सजाना ।। किसी को अपनी सोच से मिटा कर... किसी और को बसाना।। आसान है क्या  किसी का दिल तोड़ कर...   अपनों के लिए किसी  और के साथ जुड़ जाना।।  किसी और की सांसो से निकलकर... किसी और की सांसो में मिल जाना ।। आसान है क्या  किसी और के सपने देख...  हकीकत में किसी और का हो जाना।। किसी और का हाथ छोड़ ..... मंडप में किसी और का  हाथ थाम कर बैठ जाना ।। आसान है क्या  मोहब्बत का धागा उतार कर... किसी और की मोतियों के धागों में बंध जाना।। माथे से किसी के चुंबन को हटाकर...  किसी और के रंग में रंग जाना।। आसान है क्या  आंखों के सामने अपनी चाहत को ना देख...  अपनी शराफत को देखना।। अपनी महबूबा के शादी के दिन..  अकेले दर्द में बैठकर आंसू बहाना।। आसान है क्या  ना चाहते हुए भी उसे....  किसी और के साथ जाते देखना।। हर दिन ये ख्याल आना....  मुझे छोड़‌ वो किसी और की बाहों में होगी  हर दिन किसी और की पनाहों में होगी।। आसान है क्या  बरसों की यादों को... एक पल में मिट...